
पुखराज एक ऐसा रत्न है जिसे लगभग सभी राशि के व्यक्ति पहन सकते है लेकिन असली समस्या यह है की असली पुखराज को पहचाने कैसे ( Yellow Sapphire Identification ) यह हल्के पीले रंग से लेकर गहरे पीले रंग तक तथा भूरे पीले रंग तक भी पाया जाता है. जिसे हम yellow sapphire के नाम से भी जानते है ज्योतिष शास्त्र मे इसे बृहस्पति गृह से जोड़ कर देखा जाता है. यह काफी सख्त रत्न होता है इस पर हीरे के अलावा कोई अन्य रत्न खरोच नहीं डाल सकता यह एक बहुमूल्य रत्न है.
पुखताज एक कोरंडम प्रजाति का रत्न है जिसका पीला रंग अलुमियम ओक्ससाइड की वजह से होता है यह पुखराज की अशुद्धता के वजह से होता है और समय बीतने के साथ जैसे जैसे इस रत्न का उपयोग होता है इसका रंग हल्का होता जाता है परन्तु यह प्रिक्रिया काफी धीमी है इसलिए इसका आसानी से पता नहीं चलता
पुखराज विश्व के विभिन्न देशो मे पाया जाता है जैसे श्री लंका , मेडागास्कर और तंजानिया आदि इसमें सबसे बढ़िया पुखराज श्री लंका का होता है
पुखराज को specific Gravity 3.99 से लेकर 4.00 तक होता है अर्थात पुखराज का घनत्व काफी अधिक होता है श्री लंका के पुखराज को हम सीलोनी पुखराज के नाम से भी जानते है श्रीलंका का पुराण नाम सिलोनी है जो की आधिकारिक तरीके से 1815 से लेकर 1972 तक था सिलोनी का अर्थ होता है सिंहो का देश। 1972 मे वह के सरकार ने आधिकारिक तौर पर नाम बदल कर श्री लंका कर दिया
पुखराज को पहचानने मे प्रयोगशाला मे जिन परीक्षणों के द्वारा पता लगाया जाता हैजिनके द्वारा रत्न प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है ( Gem Testing Certificate ) उनके नाम इस प्रकार से है
रंग ( Color ) = सबसे पहले रत्न के रंग को देखा जाता है वह हल्के पीले रंग से लेकर गाढ़े पीले रंग तक हो सकता है सब बढ़िया रंग वह होता है
जो पूर्ण रूप से पीला हो तथा उसमे ऑरेंज या हरे रंग की बिलकुल भी झलक न हो
कठोरता ( Hardness) = कठोरता का अर्थ होता है की कौन सा रत्न किसी दूसरे रत्न पर खरोच डाल सकता है पुखराज की कठोरता मोह स्केल पर ९ होती है
पारदर्शिता ( Transpiracy )= पुखराज की गुणवत्ता ला पता लगाने के लिए इसे प्रकश की दिशा मे उठाकर देखते है यदि इसमें से आप आर पार देख सकते है तो इसका अर्थ है की पुखराज अति उत्तम गुणवत्ता का है
कटाव ( Cutting )= इसे पता चलता है की पुखराज की कटिंग कितनी अच्छी हुई है कही से टेढ़ी मेढ़ी कटिंग तो नहीं हुई। पुखराज की कटिंग किसी भी प्रकार की हो सकती है जैसे ओवल, गोल या चौकोर आदि
इन् सभी परीक्षणों के पश्चात यह सत्यापित हो जाता है की पुखराज असली है अथवा नकली
आजकल आपने एक नया शब्द सुना होगा की पुखराज बैंकॉक का है आइये पता लगते है की बैंकॉक पुखराज किसे कहते है
बैंकॉक पुखराज का अर्थ यह नहीं की पुखराज बैंकॉक मे जमीन से निकाला गया है बैंकॉक पुखराज का अर्थ है की वह पुखराज का उपचार करके उसकी पारदर्शिता एवं गुणवत्ता मे वृद्धि की जाती है यहाँ उससे 1700 से लेकर 1800 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है जिसके कारण उसमे उपस्थित विशुद्धिया नष्ट हो जाती है इसलिए यह सामान्य तौर पर माना जाता है की पुखराज को गर्म अवशय किया गया होगा
पुखराज का परिक्षण आप बिना किसी प्रयोगशाला मे भेजे स्वयं भी कर सकते है वह भी सिर्फ लूप की सहायता से, आइये बताते है कैसे ?
सबसे पहले आप पुखराज को लीजिये और लूप की सहायता से उसमे देखिये अगर उसमे कही कही गहरे धब्बे है तो इसका अर्थ है की वह बैंकॉक का पुखराज है तथा उसका रंग बढ़ने के लिए उसका उपचार किया गया है
अगर पुखराज के अंदर लूप की सहायता से देखने पर छोटे छोटे हवा के बुलबुले दिखाई देते है तो वह कोई प्लास्टिक जैसे पदार्थ है
और यदि उसमे कोई काले धब्बे दिखाई देते है तो वह मनुष्य द्वारा निर्मित कोई नकली पत्थर है इसलिए राशि रत्न खरीदते हुए काफी सावधानी की आवश्यकता पड़ती है