राशि रत्न प्रमाण पत्र ( Gem Testing Certificate ) को समझना कैसे है आज हम इस बात को समझेंगे. सामान्यता लोग राशि रत्न का प्रयोग भरोसे पर ही करते है हम जहाँ कहीं से भी राशि रत्न खरीदते है हम भरोसा करते है की विक्रेता हमारे साथ गलत नहीं करेगा और इसका सबसे बड़ा कारण है की हमे राशि रत्न के बारे मे बिलकुल भी जानकारी नहीं है यद्धीपी सुविधाजनक बात यह है कि आजकल राशि रत्न परिक्षण केंद्र जिसे हम Gem Testing Lab के नाम से भी जानते है काफी मात्रा मे खुल गए है जो हमे परिक्षण के पश्चात यह बताते है की रत्न असली है अथवा नहीं.
क्या आप जानना चाहते है की वे ऐसा क्या परिक्षण करते है की उन्हें पता चल जाता है की रत्न असली है अथवा नहीं। इसके लिए हमे सबसे पहले यह देखना होगा की जो certificate हमे प्राप्त होता है उस certificate मे किन किन परीक्षणों के द्वारा पता लगाया गया है आइये Gem Testing Certificate देखते है।
प्रमाण पत्र नंबर (Lab Certificate Number ): – प्रमाण पत्र मे सबसे पहले प्रमाण पत्र नंबर दिया होता है जो की हर प्रमाण पत्र पर प्रयोग शाळा के अनुसार अलग होता है इसी प्रमाण पत्र संख्या से हमे पता चलता है की किस राशिरत्न का परिक्षण कब किया गया है तथा परिक्षण के पश्चात क्या निष्कर्ष रहा
बहुत साड़ी Gem Testing Lab यह सुविधा प्रदान करते है की आप यह प्रमाण पत्र ऑनलाइन भी देख सकते है राशि रत्न को परखने के विभिन्न तरीके है जिनके बारे मे आगे बताया गया है.
आकार एवं कटान ( Shape and Cutting ) :- यहाँ हमे यह पता चलता है की राशि रत्न का आकार कैसा है राशि रत्न की कटिंग बहुत प्रकार की हो सकती है जैसे गोल, चौकोर, तिकोना ,ओवेल आदि इसके आधात पर पता चलता है की जो राशिरत्न परिक्षण के लिए आया है उसका आकार कैसा है
तथा उसकी कटिंग कैसी की गयी है क्या यह कटिंग उत्तम प्रकार की है या निम्न प्रकार की है.
वजन ( Weight ):- यहाँ हमे यह पता चलता है की दिए गए राशिरत्न का वजन कितना है क्युकि रत्न खरीदने का मुख्या आधार वजन ही है ज्योतिषाचार्य व्यक्तियों को राशि रत्न एक दिए हुए वजन के अनुसार ही पहनने के लिए बताते है ताकि वह रत्न व्यक्ति के लिए लाभदायक हो सके. प्रमाण पत्र मे वजन कैरट या रत्ती मे दिया होता है.
नाप ( Measurement ):- यहाँ राशिरत्न का नाप बिलकुल सही प्रकार से दिया जाता है रत्न का नाप ऐसा परिक्षण है जो सभी राशि रत्न मे अलग पाया जाता है एक जैसे दिखने वाले कोई भी 2 या 3 राशि रत्न का नाप एक होना लगभग असंभव है उनके नाप मे कोई न कोई अंतर अवश्य होगा. कही लम्बाई नहीं मिलेगी, कही चौड़ाई या कही ऊचाई इसी प्रकार कोई न कोई अंतर अवश्य पाया जायेगा इसलिए इन्हे पहचानना और भी ज्यादा आसान हो जाता है .नाप ऐसा कारक भी है जिसमे अगर एक ही वजन के 2 पत्थर भी दिए गए हो तो उन्हें आसानी से अलग अलग पहचाना जा सकता है
रंग ( Color ) :- यहाँ राशि रत्न के रंग को प्रमुखता से बताया जाना है की रत्न का रंग कम है या ज्यादा अर्थात मान लीजिये पुखराज पत्थर का वर्णन किया जाता तो पुखराज हल्के पीले रंग का है या ज्यादा गाढ़े पीले रंग का या हल्का सफ़ेद रंग का है.
प्राकृतिक लक्षण ( Optic Character ) :- यहाँ रत्न का प्राकृतिक परिक्षण किया जाता है यह परिक्षण केवल उन्ही रत्नो का किया जा सकता है जिनमे से प्रकाश जा सकता है इनमे 2 प्रकार के प्राकृतिक लक्षण पाए जाते है सिंगल ऑप्टिक जिसे हम S R के नाम से जानते है या डबल ऑप्टिक या जिसे हम D R के नाम से भी जानते है यह परिक्षण पोलोराइज़ड मशीन के माध्यम से किया जाता है जैसा की ऊपर मशीन का दिए चित्र दिया गया है इसके नीचे छोटी जलती रहती है तथा ऊपर की २ शीशे के लांस लगे होते है जो की पोलोराइज़्ड होते है
यदि दोनों लांस को एक हो दिशा मे किया जाये और रत्न मे से प्रकश आर पार चला जाये और यदि दोनों लांस अलग अलग दिशा मे किये जाए और उनमे से प्रकश आर पार न हो तो रत्न S R यानी single refractive है
और यदि दोनों लेंस अलग अलग दिशा मे हो उसके बाद भी यदि प्रकश आर पार चला जाये इसका अर्थ है स्टोन D R है यानी double refractive है.

अपवर्तक सूचकांक ( Refractive index ) :- आइये सबसे पहले यह पता करते है की अपवर्तक सूचकांक होता क्या है सामान्यतय अपवर्तक किसी भी माध्यम का एक ऐसा गुण है जिसके आधार पर यह पता चलता है की माध्यम मे प्रकश किस वेग से गति करेग। इसमें प्रकश उस पदार्थ से टकराकर कितना मुड़ता है इसी प्रकार पुखराज का अपवर्तक सूचकांक 1.76 है मतलब जब कभी भी पुखराज पत्थर का परिक्षण किया जायेगा रेफेरैक्टिवे इंडेक्स 1.76 हो होगा
इस प्रकार यह सुनिश्चित होता है की यह पुखराज हो हैजैसा ऊपर चित्र मे दिया गया हैं

सूक्षम अवलोकन (Microscopic Observation ) :- इस परिक्षण मे Microscope के माध्यम से गहन अध्यन किया जाता है यह राशि रत्न प्रमाण पत्र( Gem Testing Certificate ) का सबसे उत्तम तरीका है इस परिक्षण मे रत्न के अंदर गहन अध्यन किया जा सकता है तथा यह भी पता लगाया जा सकता है की रत्न की उत्तमता (Quality )को बढ़ने के लिए क्या क्या कोशिशे की गई है जैसा ऊपर चित्र मे दिया गया हैं
क्या रत्न की पारदर्शिता को बढ़ने के लिए इसे गर्म किया गया है या इसी प्रकार कोई और उपचार तो नहीं किया गया. जैसा ऊपर चित्र मे दिया गया हैं

विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण ( Specific Gravity ):- विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण एक ऐसा परिक्षण है जिसमे यह पता लगाया जाता है की वह पदार्थ पानी की तुलना मे कितना ज्यादा भारी है सभी पदार्थ चाहे वह रत्न हो, कोई धातु हो या कोई अन्य पदार्थ.
जिस प्रकार corundum का स्पेसिफिक ग्रेविटी 4 है अर्थात आप कभी भी इस पत्थर की स्पेसिफिक ग्रेविटी पता करेंगे तो वह 4 हो मिलेगी। यह किसी भी रत्न का अंतिम एवं आवश्यक परिक्षण है इसके पश्च्यात 100 % यह पता चल जाता है की रत्न क्या है और इन् सभी परीक्षणों के पश्चयात कुछ नया पता चलता है तो उससे कमैंट्स मे लिख दिया जाता है।
निष्कर्ष ( result ):- और इन् सभी परीक्षणों के पश्चयात कुछ नया पता चलता है तो उससे कमैंट्स मे लिख दिया जाता है।
इन् सारे परीक्षणों के पश्च्यात जो अंतिम निष्कर्ष निकलता है उसे हि प्रमाण पत्र मे लिख दिया जाता है और यह सत्यापित हो जाता है की रत्न असली है अथवा नहीं ऊपर दिए गए सभी परीक्षणों का क्रम ऊपर या नीचे हो सकता हैं जिसका निर्णय परिक्षण केंद्र श्याम